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बुधवार, नवंबर 05, 2014

प्रदक्षिणा क्यों और कैसे?



हिन्दू धर्म में ईश्वर के दर्शन करने के बाद दर्शनार्थी द्वारा परिक्रमा की परंपरा है | वैदिक काल से चली आ रही यह परंपरा फल प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण अवश्य है | आइये समझते हैं कि यह परम्परा क्यों है  तथा नारद पुराण के अनुसार किस भगवान की कितनी प्रदक्षिणा करनी चाहिए |

ब्रह्माण्ड में हर ग्रह किसी बड़े ग्रह के चारों ओर घूमता है जैसे कि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर
Photo Courtesy : Divineindia.org
प्रदक्षिणा करता है, पृथ्वी सूर्य की करती है |  भक्त अपनी शक्ति ईश्वर से प्राप्त करता है इसलिए यह प्रदक्षिणा स्वाभाविक है |

प्रदक्षिणा प्राय घड़ी की सुइयों की दिशा यानिकि क्लोक वाईज की जाती है | परिक्रमा करते समय दायां हाथ मूर्ति की दिशा में रहना चाहिए | मार्ग में चलते वक्त ईश्वर का नाम जपते रहना शुभ समझा जाता है |

प्रदक्षिणा जहां से प्रारंभ की जाती है वहीँ पर पूरी की जाती है, केवल शिव की प्रदक्षिणा को पूर्ण नहीं किया जाता | शिव मंदिर में जहां गौमुख से भगवान को चढ़ाया जल निकलता है वहाँ परिक्रमा को छोड़ देने या विपरीत दिशा में परिक्रमा पूरी करने का प्रावधान है |

शक्ति की देवी दुर्गा की एक प्रदक्षिणा, गणेश की तीन, विष्णु की चार एवं सूर्य देव की सात परिक्रमाएं करनी चाहिए | यज्ञ के बाद वेदी की तीन परिक्रमाएं करने से पूर्ण फल मिलता है | पवनपुत्र हनुमानजी की तीन प्रदिक्षणाएं  करने से सभी प्रकार के भय दूर होते है | सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की १०८ परिक्रमाएं करनी चाहिये |

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क्या हम रावण नहीं है ?



हाल ही में दशहरा और दिवाली गई | इन दोनों पर्वो पर हमने माना कि फलां फलां तरह के रावण
को मार देना चाहिए | जैसे किसी ने कहा महंगाई के रावण का वध करो ,  किसी ने कहा भ्रष्टाचार के रावण को परास्त करो ... | लेकिन के हम रावण के चरित्र की विवेचना करते है ? क्या हम में से अधिकांश रावण के नजदीक नहीं हैं ?

पहले रावण के विषय में जो मान्यताएं हैं उन्हें लिस्ट करते हैं | रावण बहुत ज्ञानी था, रावण शिव (ईश्वर) का परम भक्त था , शास्त्रों का ज्ञाता था ,  धन का लोभी था, उसे अपना साम्राज्य बढ़ाना था , परस्त्री के प्रति लोलुप था ....

यदि एक मानव मन की आकांक्षाओं की सूचि बने जाये तो इनमे से अधिकतर मिल जाएंगी | हम सामान्यतः ईश्वर में आस्था रखते हैं | आमतौर पर हम मानते हैं कि हमें हमारे क्षेत्र का ज्ञान दूसरों से अधिक है| अपने अधिकार क्षेत्र के विस्तार में लगे रहते है, चाहे वह नौकरी में पड़ के रुप में हो, व्यापार में मार्केट शेयर के रुप में हो, समाज में प्रभाव के रुप में हो | इस विस्तार को हासिल करने के लिए जो भी बन पड़ता है करते हैं |


धन को पाने के लिए सही गलत सब करते है | नौकरी, व्यवसाय, माता पिता से हिस्सा, शेयर, प्रोपर्टी में निवेश और ना जाने क्या क्या ..?  धन कितना भी मिल जाये और अधिक की लालसा लगी रहती है | सुविधाएं कितनी भी मिल जाये और पाने की इच्छा रहती है |

क्या यही सब रावण में नहीं था ? लेकिन रावण में एक अच्छाई भी थी जिसे गौर करना चाहिए | उसमे स्वार्थ की भावना संभवतः उतनी नहीं थी जो कई मनुष्यों में सुलभ है |  जिसकी वजह से माना जा सकता है कि जिस रावण का पुतला हम जलाते है , जिसकी बुराई करते हम थकते नहीं हम उससे भी गए गुजरे है |

राम को युद्ध के पूर्व पूजा करनी थी तब रावण ने ही पूजा संपन्न करवाई थी और राम को विजय का आशीर्वाद दिया था | रावण अगर स्वार्थी होता तो यह आशीर्वाद ना देता क्योंकि राम का युद्ध से उससे ही होना था | लेकिन एक ब्राह्मण के रुप में उसने वही किया जो कि अपेक्षा रखी जाती है |
दरअसल हम अपनी जिंदगी खपा देते हैं हर उस चीज को हासिल करने के लिए जो हमारे पास नहीं है और जो मिल गया है, उसमे कोई रूचि नहीं है , उसकी कद्र ही नहीं रहती | जब तक नौकरी नहीं मिली प्रयत्न करते हैं | मिल जाती है तो दूसरी ढूंढने लगते हैं | घर में हमेशा घुटन महसूस करते है क्योंकि वह है , उससे भागना चाहते हैं |  जब बाहर होते है तब उसी घर की याद आती है |
 
रावण का भी यही गुणधर्म है। जो दूसरे के पास है उसे हासिल करना है, जो अपने पास है वह व्यर्थ है। अगर हम इस पर विजय पा लें तब ही हमें हक मिलना चाहिए अगले वर्ष रावण के पुतले को जलाने का |

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रविवार, अप्रैल 27, 2014

ज्यादा मतदान का मोदी षड़यंत्र

मोदी को चुनाव कुछ उद्योगपति  लड़वा रहे हैं, यह गैर भाजपाई नेता काफी समय से चिल्ला रहे हैं| मोदी के कट्टर विरोधी और पत्रकार आकार पटेल ने इसका जबरदस्त प्रमाण दिया है | शायद यह दिग्विजयसिंह और बेनीप्रसाद के दिमाग में भी नहीं आया होगा कि स्टार टीवी का एक विज्ञापन गैर लोकतांत्रिक है | इस विज्ञापन  में उच्च शिक्षा लेने विदेश जा रहे एक विद्यार्थी को काउंसिलर याद दिलाती है कि जिस दिन वह जाना चाह रहा है वोह मतदान का दिन है |

संभवतः आप सोच रहे होंगे कि मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करना कैसे अलोकतांत्रिक बात है ?  मतदान कर आप अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनते हैं | पर अगर किसी को नहीं चुनना है तो जबरदस्ती कैसी?  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग को ईवीएम मशीनों में “नोटा” बटन लगाना पड़ा, ताकि मतदाता उस विकल्प को भी चुन सके जिसमें वह सभी उमीदवारों को अस्वीकार कर सके | लेकिन जिन्हें ये भी ना बताना हो कि उसे कोई भी पसंद नहीं, वह क्यों दवाब को झेले?
बात यहीं नहीं रूकती दिल्ली में कुछ पेट्रोल पंपों ने वोट डालकर पेट्रोल डलवाने वालों को प्रति लीटर 50 पैसे की छूट दी | बंगलौर में एक बार वाले ने वोट डालकर बार में पीनेवालों को एक पेग मुफ्त दिया | इसी तरह डाक्टरों की टीम ने  वोट डालकर आने वाले ओपीडी मरीजों से 10 प्रतिशत कम फीस लेने की घोषणा की |

एक विदेशी समाचार संस्था – रायटर  ऐसे प्रयासों की वकालत करते हुए लिखती है कि 2009 में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में महज 58 फ़ीसदी मतदान हुआ था | 58 फ़ीसदी रायटर के लेखकों को कम लगता है , पर हमारे लिए काफी है | बड़ी मुश्किल से एक और छुट्टी मिलती है , बिस्तर तोडने के लिए | इसे जाया कर दिया तो हमारे स्वप्निल भाग्यवाद का क्या होगा?

आखिर हर कोई क्यों पीछे पड़ा है कि वोट डालो - वोट डालो | सीधी सी बात है, जनता सरकार से दुखी है, अगर ज्यादा वोट पड़ेंगे तो काँग्रेस और उसके समर्थकों के हारने की सम्भावना ज्यादा है | यही वजह है मोदी समर्थक व्यवसाई ऐसे विज्ञापन दे रहे हैं |

हद तो इस बात की है कि महाराष्ट्र में खुद इलेक्शन कमीशन में पोस्टर तथा विज्ञापनों में ना केवल लोगों से वोट डालने की अपील की, बल्कि कहा कि “ ऐसे उमीदवारों को वोट करें जो शिक्षित हों एवं विकासशील विचारधारा के हों “. अब इलेक्शन कमीशन को किसने कहा कि ऐसा प्रचार करो | ये सीधे सीधे यूपीए के उमीदवारों के विरुद्ध मत डालने की अपील थी | अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई तो इस साल के आखिर में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनावों में भी  कांग्रेस – एनसीपी  का सूपड़ा साफ़ हो जायेगा|

जितने कम वोट डाले जायेंगे उतना ही मोदी पीएम की कुर्सी से दूर रहेगा , उतना ही देश साम्प्रदायिक ताकतों से बचा रहेगा | विकास और नौकरी का क्या है, ऊपर वाले ने जब नीचे भेजा है तो कुछ ना कुछ तो इंतजाम करेगा ही – मनरेगा, नरेगा या भिक्षामदेहि सब उसकी मर्जी है |  समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी नहीं मिलता तो मोदी कहाँ से दे देगा? लेकिन हमें मतदान बढ़वाने का मोदी के षड़यंत्र  का पर्दाफाश तो करना ही पड़ेगा |

अगर ज्यादा मतदान करवाना ही है तो शरद पवार जी का फार्मूला है, मधेपुरा के बाहुबल का भरोसा है |  इन तरीकों को अपनाने से देश का भला होगा – अपना हाथ एक बार फिर अपने गाल पर होगा |  दिग्गीजी, सिब्बलजी, प्रियंकाजी आगे बढ़ो और वोट डालने को प्रोत्साहित करने वाल्रे हर प्रयास को बैन करवा दो |  आकार पटेलजी को इतने करामाती सुझाव के बदले राज्यसभा में भेजना नहीं भूलना |


सही वोटर वही है जिसने मतदान मथक पर आने की कीमत पहले ही वसूल ली है, जो यह प्रश्न नहीं पूछता कि पिछले दस साल क्या किया? राष्ट्रवादी वही है जो अपनों से डरता है और पाकिस्तान से अपने सैनिकों के सर कटवाकर चुप रहता है | 

यह लेख नभाटा में २७ अप्रैल को लाइव हो चुका है   NBT Blog Link


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मेष का केतु और तुला का शनि यूपीए के लिए अनिष्टकारी रहेगा

14 अप्रैल से सूर्य के मेष राशि में भ्रमण करने के साथ ही कमुरते समाप्त हो गए हैं और मांगलिक कार्यों के मुहूर्त शुरू हो गए हैं | ऐसे में ग्रहदशा राजनीतिक दलों को कितना मंगल करा पाती है यह 16  मई को पता चलेगा |
मेष राशि में फ़िलहाल केतु भी मौजूद है | दूसरी तरफ तुला राशि में भ्रमण कर रहे शनि और राहू प्रतियुति योग बनाते हैं | यह योग विपक्ष को मजबूत बनाता है तथा सत्ताधीशों को कमजोर करता है | सूर्य सत्ता का कारक है वहीँ केतु अतृप्ति इंगित करता है इसलिए काँग्रेस के दुबारा सत्ता में आने की मुराद मन में ही रह जायेगी | मतदान का बड़ा भाग सूर्य के मेष राशि में १४ मई तक के भ्रमण के दौरान ही होना है | शनि और राहू की युति विरोध को जन समर्थन प्रदान करती है|

स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में कर्क राशि है | देश के 13 में से 9 प्रधानमंत्री भी कर्क राशि के ही हुए हैं | फ़िलहाल जिन तीन नेताओं की चर्चा है – नरेन्द्र मोदी, राहुल गाँधी और केजरीवाल, यह क्रमशः वृश्चिक, धनु और बृषभ राशिवाले हैं |

इन तीन नेताओं की कुंडली में से नरेन्द्र मोदी की कुंडली में सूर्य की वर्तमान स्तिथि “विजययोग” का निर्माण करती है | उनकी कुंडली में चंद्र की महादशा चल रही है जो उच्च पद प्राप्त करने में सहायक हो सकती है| सूर्य और शनि परस्पर शत्रु ग्रह चर राशि में राहू और केतु के साथ होने से मोदी के लिए दुर्घटना या षड़यंत्र की सम्भावना भी बनाती है |

धनु राशि से मेष का सूर्य पांचवा होने से राहुल गाँधी को मेहनत के अनुरूप परिणाम नहीं मिल पायेंगे | उनकी  ज्यादातर  चालें उल्टी पड़ती दिखाई देंगी | समय राहुल के अनुरूप नहीं है, ऐसे में अगर वह अहं एवं  कुसंगति से बच सकें तो आने वाले समय में नुकशान की भरपाई कर पायेंगे |
वहीँ केजरीवाल की कुंडली में मेष का सूर्य वृषभ राशि से बारहवें स्थान पर होने से साथीयों तथा मित्रों से मनमुटाव को इंगित करता है| इनके समर्थकों से वांछित सपोर्ट नहीं मिलेगा, वाराणासी से इनके जीतने की सम्भावना काफी कम है, सम्भावना है कि यह दूसरे स्थान पर भी ना आ पायें |


कुंडली में सूर्य से अष्टम भाव में मौजूद राहू केजरीवाल को गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है| दिल्ली के मुख्यमंत्री पड़ से त्यागपत्र एक ऐसा ही निर्णय था | आम आदमी पार्टी के संयोजक की वर्तमान दशा में शनि और राहू लाभ पहुंचा रहे हैं| नीच राशि का शनि उन्हें चुनौती लेने के लिए प्रेरित करता है | लेकिन मंगल परेशानी का कारण बन सकता है, हालांकि वह अपनी साख बच पाएंगे|

यह लेख १६ अप्रेल, २०१४ को नभाटा में प्रकाशित हो चुका है

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इतिहास में दर्ज एक झूठ

Napoleon  Height 1.68 Mt
Ruled France 1804 - 14
Born on 15th August
इतिहास के बारे में कहा जाता है कि जो किताब में लिखा है वह हमेशा सच होगा, परन्तु यह जरुरी नहीं| हर इतिहासकार घटना को अपने नजरिये से देखता और लिखता है | लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी हम उन्हें सच मानते रहते हैं |  ऐसा ही एक असत्य तथ्य नेपोलियन बोनापार्ट को लेकर है |

मनोविज्ञान में एक बीमारी का नाम है – “नेपोलियन सिंड्रोम” |  इसका प्रयोग लघुताग्रंथि से पीड़ित मरीजों के लिए किया जाता है |  अंग्रेज वैज्ञानिकों ने लघुताग्रंथि को नेपोलियन सिंड्रोम नाम इसलिए दिया था क्योंकि नेपोलियन बोनापार्ट के कद के बारे में भ्रान्ति थी कि वह ठिगना था |  इतिहासकारों के अनुसार बोनापार्ट का कद ५ फुट २ इंच था | अपने युद्ध कौशल और व्यूहरचना के लिए प्रख्यात नेपोलियन को अंग्रेज और उस पर आधारित इतिहास लिखने वाले इतिहासकार उसे ठिगना ही कहते रहे |


यह सच है कि फ्रेंच इतिहास में भी उसके कद की लम्बाई ५ फुट २ इंच ही दर्ज है | परन्तु यह भी एक हकीकत है कि फ्रेच फुट इंग्लिश फुट से लम्बा होता है | एक फ्रेंच फुट लगभग तेरह इंग्लिश इंच के बराबर होता है | यानिकि  नेपोलियन का कद ६७ इंग्लिश इंच या ५ फुट ७ इंच के बराबर हुआ | जोकि एक सामान्य कद है, ठिगना नहीं |


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गुरुवार, मार्च 27, 2014

सूर्य और मंगल मोदी का कल्याण कर सकते हैं

इस सप्ताह २५ मार्च से मंगल ग्रह तुला राशि छोड़  अगली  राशि में वक्री बनेगा. पृथ्वी तत्व की कन्या राशि में आये इस परिवर्तन का प्रभाव अगले माह से शुरू हो रहे लोकसभा चुनावों में दिखाई देगा |  मंगल ग्रह के अनुरूप उग्रता वातावरण में दिखाई देगी |  शक्ति का स्वामी मंगल युवा वर्ग को  जुलाई तक गतिशील रखेगा | उग्र प्रदर्शन, दंगे तथा धमाल का अधिपत्य रहने से इस बार चुनाव कम शांतिपूर्ण तथा माहौल युद्धमयी रहेगा |  प्राकृतिक विपदा भी इस दौरान
घट सकती है |

इसी माह सूर्य ग्रह ने गुरु के घर की मीन राशि में प्रवेश किया है और वहाँ १४ अप्रैल तक रहेगा | मीन राशि का सूर्य  वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक  तथा मकर राशि के जातकों को शुभ फल देने वाला होगा | इस दौरान इन राशियों के जातकों को कार्यस्थान में सफलता मिलेगी | इस दौरान ये जातक जीवन में उत्साह एवं स्फूर्ति का अनुभव करेंगे |

मीन राशि का सूर्य  मेष, मिथुन, एवं कुम्भ राशि के जातकों से अपव्यय करवाएगा, कामकाज में विलम्ब अपयश का कारण बन सकता है |  शेष राशियों के लिए ये परिवर्तन मध्यम फल देने वाला रहेगा |

नरेन्द्र मोदी और राहुल गाँधी दोनों वृश्चिक राशि वाले है जबकि केजरीवाल वृषभ राशि के हैं और मीन का सूर्य इन तीनों को  मदद करेगा | लेकिन मंगल मोदी को अन्य दो के मुकाबले अतिरिक्त फायदा करवाता दिखाई पड़ रहा है |

मोदी का लग्न तुला है इसलिए मंगल ग्यारहवां होने से पदोन्नति का कारक बन सकता है | जबकि सिंह लग्न की कुंडली वाले राहुल गाँधी के लिए कई बार खिसियाने के अवसर आयेंगे |  अरविन्द केजरीवाल की जन्म राशि वृषभ से गोचर का मंगल दसवें स्थान पर होने से मेहनत के अनुरूप फल प्रदान नहीं करेगा | इस दौरान इनके कुछ करीबी साथ छोड़ सकते हैं | अनायास चिंता और शारीरिक कष्टों का सामना भी करना पड़ सकता है |

ग्रहों की स्तिथि इंगित करती है कि जो नेता युवावर्ग को अपने पक्ष में रखेगा वह १६ मई को सर्वाधिक लाभ में रहेगा |

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शनिवार, मार्च 22, 2014

अर्थ सहित - हनुमान चालीसा

हनुमानजी महाराज सर्व सुलभ हैं | हनुमान चालीसा प्रायः कई भक्त जपते हैं | यहाँ उसका भावार्थ दिया है, जिससे तुलसीदासजी रचित इस रचना को बेहतर समझा जा सके

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस विकार॥
सद्गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ कर, श्रीराम के दोषरहित यश का वर्णन करता हूँ जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार फल देने वाला है। स्वयं को बुद्धिहीन जानते हुए, मैं पवनपुत्र श्रीहनुमान का स्मरण करता हूँ जो मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करेंगे और मेरे मन के दुखों का नाश करेंगे॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
श्री हनुमान की जय हो जो ज्ञान और गुण के सागर हैं, तीनों लोकों में वानरों के ईश्वर के रूप में विद्यमान श्री हनुमान की जय हो॥

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥    

आप श्रीराम के दूत, अपरिमित शक्ति के धाम, श्री अंजनि के पुत्र और पवनपुत्र नाम से जाने जाते हैं॥

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
आप महान वीर और बलवान हैं, वज्र के समान अंगों वाले, ख़राब बुद्धि दूर करके शुभ बुद्धि देने वाले हैं,

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥
आप स्वर्ण के समान रंग वाले, स्वच्छ और सुन्दर वेश वाले हैं, आपके कान में कुंडल शोभायमान हैं और आपके बाल घुंघराले हैं॥

हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥५॥
आप हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा धारण करते हैं, आपके कंधे पर मूंज का जनेऊ शोभा देता है,

शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥६॥
आप श्रीशिव के अंश और श्रीकेसरी के पुत्र हैं, आपके महान तेज और प्रताप की सारा जगत वंदना करता है॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥७॥
आप विद्वान, गुणी और अत्यंत बुद्धिमान हैं, श्रीराम के कार्य करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं,

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लषन सीता मन बसिया॥८॥
आप श्रीराम कथा सुनने के प्रेमी हैं और आप श्रीराम, श्रीसीताजी और श्रीलक्ष्मण के ह्रदय में बसते हैं॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
आप सूक्ष्म रूप में श्रीसीताजी के दर्शन करते हैं, भयंकर रूप लेकर लंका का दहन करते हैं,

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥
विशाल रूप लेकर राक्षसों का नाश करते हैं और श्रीरामजी के कार्य में सहयोग करते हैं॥


लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥११॥
आपने संजीवनी बूटी लाकर श्रीलक्ष्मण की प्राण रक्षा की, श्रीराम आपको हर्ष से हृदय से लगाते हैं।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥
श्रीराम आपकी बहुत प्रशंसा करते हैं और आपको श्रीभरत के समान अपना प्रिय भाई मानते हैं॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥
आपका यश हजार मुखों से गाने योग्य है, ऐसा कहकर श्रीराम आपको गले से लगाते हैं।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देव और मुनि, नारद, सरस्वती जी सहित सभी  आशीर्वाद देते हैं



जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
यम, कुबेर आदि दिग्पाल भी आपके यश का वर्णन नहीं कर सकते हैं, फिर कवि और विद्वान कैसे उसका वर्णन कर सकते हैं।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥१६॥
आपने सुग्रीव का उपकार करते हुए उनको श्रीराम से मिलवाया जिससे उनको राज्य प्राप्त हुआ॥


तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥१७॥
आपकी युक्ति विभीषण ने  मानी और उसने लंका का राज्य प्राप्त किया, यह सब संसार जानता है।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥१८॥
आप सहस्त्र योजन दूर स्थित सूर्य को मीठा फल समझ कर खा लेते हैं॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥१९॥
प्रभु श्रीराम की अंगूठी को मुख में रखकर आपने समुद्र को लाँघ लिया, आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
इस संसार के सारे कठिन कार्य आपकी कृपा से आसान हो जाते हैं॥


राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
श्रीराम तक पहुँचने के द्वार की आप सुरक्षा करते हैं, आपके आदेश के बिना वहाँ प्रवेश नहीं होता है,

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डरना॥२२॥
आपकी शरण में सब सुख सुलभ हैं, जब आप रक्षक हैं तब किससे डरने की जरुरत है॥


आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥२३॥
अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं, तीनों लोक आपकी ललकार से काँपते हैं।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥२४॥
केवल आपका नाम सुनकर ही भूत और पिशाच पास नहीं आते हैं॥


नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
महावीर श्री हनुमान जी का निरंतर नाम जप करने से रोगों का नाश होता है और वे सारी पीड़ा को नष्ट कर देते हैं।

संकट तें हनुमान छुडावैं।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥
जो श्री हनुमान जी का मन, कर्म और वचन से स्मरण करता है, वे उसकी सभी संकटों से रक्षा करते हैं॥


सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
सबसे ऊपर, श्रीराम तपस्वी राजा हैं, आप उनके सभी कार्य बना देते हैं।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥२८॥
उनसे कोई भी इच्छा रखने वाले, सभी लोग अनंत जीवन का फल प्राप्त करते हैं॥


चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
आपका प्रताप चारों युगों में विद्यमान रहता है, आपका प्रकाश सारे जगत में प्रसिद्ध है।

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
आप साधु- संतों की रक्षा करने वाले, असुरों का विनाश करने वाले और श्रीराम के प्रिय हैं॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
आप आठ सिद्धि और नौ निधियों के देने वाले हैं, आपको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
आपके पास श्रीराम नाम का रसायन है, आप सदा श्रीराम के सेवक बने रहें॥


तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
आपके स्मरण से जन्म- जन्मान्तर के दुःख भूल कर भक्त श्रीराम को प्राप्त करता है

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥३४॥
अंतिम समय में श्रीराम धाम (वैकुण्ठ) में जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरि का भक्त कहलाता है॥


और देवता चित न धरई।
हनुमत से हि सर्व सुख करई॥३५॥
दूसरे देवताओं को मन में न रखते हुए, श्री हनुमान से ही सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जो महावीर श्रीहनुमान जी का नाम स्मरण करता है, उसके संकटों का नाश हो जाता है और सारी पीड़ा ख़त्म हो जाती है॥


जै जै जै हनुमान गोसाई।
कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥३७॥
भक्तों की रक्षा करने वाले श्री हनुमान की जय हो, जय हो, जय हो, आप मुझ पर गुरु की तरह कृपा करें।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है वह जन्म-मृत्यु के बंधन से छूटकर महासुख को प्राप्त करता है॥


जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥
जो इस श्री हनुमान चालीसा को पढ़ता है उसको सिद्धि प्राप्त होती है, इसके साक्षी भगवान शंकर है ।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा॥४०॥
श्री तुलसीदास जी कहते हैं, मैं सदा श्रीराम का सेवक हूँ, हे स्वामी! आप मेरे हृदय में निवास कीजिये॥


पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लषन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप॥

पवनपुत्र, संकटमोचन, मंगलमूर्ति श्री हनुमान आप देवताओं के ईश्वर श्रीराम, श्रीसीता जी और श्रीलक्ष्मण के साथ मेरे हृदय में निवास कीजिये 

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