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सोमवार, जून 18, 2012

क्या शनि और राहू इस्राइल को एक और युद्ध की ओर धकेल रहे हैं?

इस्राइल राष्ट्र की तुला लग्न की कुंडली के सातवे स्थान  में राहू की शनि के साथ युति उसके संघर्ष भरे मार्ग को इंगित करती है.  केन्द्र में शनि, राहू और केतु की उपस्थिति अस्तित्व बचाने के लिए इस राष्ट्र के अनवरत संघर्ष को दर्शाती है.
सुख के चौथे स्थान  में स्वगृही कर्क राशि के चंद्र पर शनि की अशुभ दृष्टि और केन्द्र में राहू-केतु की उपस्थिति के कारण इस्राइल के नागरिक मेहनत से अर्जित सम्पति को शान्ति से भोग नहीं पाते हैं.
लग्नेश शुक्र भाग्यस्थान में होने से बलवान है. इस पर धनु राशि के स्वगृही गुरु की शुभ दृष्टि पड़ रही है. गुरु की शुभ दृष्टि लाभ स्थान में मंगल पर भी पड़ने से कुंडली मजबूत बन रही है. अपने मनोबल से इस छोटे से देश ने पेट्रो सम्पदा से संपन्न देशों को बिचारा बनाया हुआ है.
15 नवंबर, 2011   से शनि ढाई वर्ष तुला राशि में भ्रमण कर रहा है. इस तरह यह जन्मकुंडली के चंद्र और राहू पर गुजर रहा है.  इसके अलावा 14 अगस्त से 28 सितम्बर तक गोचर का लड़ाकू गृह मंगल भी तुला में भ्रमण करने वाला है.  ग्रहों की यह स्तिथि इस्राइल को पडोसी अरब राष्ट्रों से घर्षण में रख सकती है.
23 दिसम्बर, 2012 से गृह मंडल का क्रूर गृह राहू तुला राशि में डेढ़ वर्ष तक रहने से स्तिथि और भी विस्फोटक बनती दिखाई दे रही है.  आगामी मई 2013 तक के दौरान पश्चिम एशिया में एक और युद्ध समतुल्य स्तिथि को नाकारा नहीं जा सकता.

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